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डैन कोंग सोंग झोंग

Dān cóng sòng zhǒng · 单丛宋种

डैन कोंग सोंग झोंग के उत्पादन तकनीक में ऊलोंग चाय बनावे के पारंपरिक तरीका आ चाओझोउ क्षेत्र के ख़ास विशेषता मिलल बा।

  • प्रकार: ऊलोंग (किण्वन के स्तर आमतौर पर मध्यम, 30–60%)। भुनाई के स्तर में बदलाव हो सकेला, बाकी अक्सर मध्यम या ओकरा से ऊपर रहेला।
  • श्रेणी: उच्च गुणवत्ता वाला, दुर्लभ, संग्रहणीय ऊलोंग चाय। ई डैन कोंग (单丛, Dān Cóng) नामक चाय समूह में आवेला, जेकर मतलब होला “एकल झाड़ी” भा “एकही झाड़ी से”।
  • उत्पत्ति: चीन, ग्वांगडोंग प्रांत (广东, Guǎngdōng), चाओझोउ शहरी जिला (潮州, Cháozhōu), फेंगहुआंग पर्वत (凤凰山, Fènghuáng Shān), जेकरा फीनिक्स पर्वत भी कहल जाला। वुडोंग पर्वत के चोटी पर बसल वुडोंग गाँव (乌崬) सभसे प्रसिद्ध उगवे के जगह हवे, जहाँ मानल जाला कि सभसे पुरान झाड़ी बाड़ी सऽ।
  • भौगोलिक निर्देशांक: लगभग 23–24° उत्तरी अक्षांश, 116–117° पूर्वी देशांतर।

2. इतिहास आ सांस्कृतिक महत्त्व:

  • इतिहास: सोंग झोंग के सभसे प्राचीन डैन कोंग में से एक मानल जाला। कथा के अनुसार, एकर इतिहास सोंग राजवंश (960–1279 ई.) के समय ले पहुँचेला, जहाँ से नाम पड़ल। दावा कइल जाला कि फेंगहुआंग पर्वत पर कई गो बहुत पुरान चाय के पेड़ बचल बाड़ें, जिनकर अनुमानित उमिर 600–900 बरिस बा, आ इहे सोंग झोंग किसिम के पूर्वज मानल जालें।

  • नाम:

    • “डैन कोंग” (单丛) – “एकल झाड़ी” भा “एकही झाड़ी से”। ऐतिहासिक रूप से, हर चाय के झाड़ी से अलग-अलग चाय तोड़ल आ संसाधित कइल जात रहे। आजु ई हमेशा सख्ती से ना पालन होला, बाकी “डैन कोंग” के मतलब अबहियो होला कि चाय एगो छोट बागान के भीतर कवनो ख़ास किसिम/उप-किसिम के झाड़ी से आइल बा।
    • “सोंग झोंग” (宋种) – “सोंग किसिम”, “सोंग किस्म” भा “सोंग राजवंश [के ज़माना] के किसिम”। ई किसिम के प्राचीन उमिर के संकेत देला।
  • सांस्कृतिक महत्त्व: डैन कोंग सोंग झोंग खाली चाय ना हवे, बालुक एगो जीवंत इतिहास हवे, चीन के सांस्कृतिक विरासत के हिस्सा। एकर दुर्लभता, आदरणीय उमिर, अनोखा स्वाद-प्रोफाइल खातिर एकर बहुत ऊँच मान हवे आ ई सभसे प्रतिष्ठित आ महँग डैन कोंग में से एक मानल जाला। ई ख़ास मौकन खातिर, सच्चा पारखी आ संग्रहकर्ता लोग खातिर चाय हवे।

3. वानस्पतिक वर्णन आ कच्चा माल:

  • किसिम: सोंग झोंग खाली चाय के नाम ना हवे, बालुक फेंगहुआंग पर्वत पर उगे वाली चाय के झाड़ियन के किसिमगत उप-प्रजाति के नाम हवे। सभ डैन कोंग नियर, सोंग झोंग सख्त वानस्पतिक अरथ में कवनो किसिम ना हवे, बालुक बेसी एगो स्थानीय किसिम हवे, जवन प्राकृतिक चयन आ अनोखा उगवे के दसा से बनल बा। एह किसिम के ख़ास बात बा:
    • बड़ पत्ता: सोंग झोंग के पत्ता आमतौर पर बड़, चौड़ा, गुद्देदार होखेलें।
    • घन पत्ता के बनावट: पत्ता के प्लेट घन, चमड़ा नियर होखेला।
    • पत्ता के गहिरा हरियर रंग: पत्ता में भरपूर गहिरा हरियर रंग होखेला।
    • प्रबल सुगंध: सोंग झोंग किसिम में एगो तेज़, ख़ास सुगंध होखेला जवन झाड़ी के बढ़ती के दौराने प्रकट हो जाला।
  • तुड़ाई: तुड़ाई आमतौर पर बसंत में होला। सभसे कीमती बसंत के सोंग झोंग मानल जाला।
  • तुड़ाई के मानक: एगो कली आ दू-तीन ऊपरी पत्ता, कब्बो-कब्बो चारो, तूरल जालें।
  • कच्चा माल के जरूरत: बहुत ऊँच होला। खाली स्वस्थ, बिना नोकसान वाला पत्ता इस्तेमाल होखेलें, कुछ ख़ास झाड़ियन से, अक्सर बहुत पुरान (“लाओ कोंग”) झाड़ियन से।

4. भू-क्षेत्र आ उगवे के ख़ासियत:

  • फेंगहुआंग पर्वत (फीनिक्स पर्वत): ग्वांगडोंग प्रांत के उत्तर-पूरबी हिस्सा में स्थित पर्वत श्रेणी हवे। पहाड़ मुख्य रूप से ग्रेनाइट आ ज्वालामुखी चट्टान से बनल बाड़ें। सुरम्य दृश्य, स्वच्छ हवा आ प्रचुर कोहरा खातिर जानल जालें।
  • उगवे के ऊँचाई: चाय के बागान समुद्र तल से 400 से 1500 मीटर के ऊँचाई पर स्थित बाड़ें। ऊँच पहाड़ी चाय (1000 मीटर से ऊपर) के खास तवज्जो दिहल जाला। वुडोंग गाँव, जहाँ सभसे पुरान झाड़ी बाड़ी स, लगभग 1100–1300 मीटर के ऊँचाई पर बा।
  • माटी: पहाड़ी माटी, अक्सर पथरीली, बढ़िया जल निकास वाली, खनिज से भरपूर।
  • जलवायु: उपोष्णकटिबंधीय मानसूनी, जाड़ा गरम-नम आ गर्मी गरम-बरखा वाली। औसत सालाना तापमान लगभग 21°C रहेला। ऊँच नमी आ बार-बार कोहरा चाय उगवे खातिर आदर्श दसा बनावेला।
  • ख़ासियत: फेंगहुआंग पर्वत पर कई गो चाय के झाड़ी बहुत पुरान बाड़ीं, कई सौ बरिस के उमिर वाली। इनके “लाओ कोंग” (老枞) – “पुरान झाड़ी” कहल जाला। मानल जाला कि अइसन झाड़ियन के चाय अउरी गहिर, जटिल स्वाद आ शक्तिशाली ऊर्जा वाली होखेला। सोंग झोंग खातिर “लाओ कोंग” खास महत्त्व रखेला, काहें कि एही किसिम के पुरान पेड़ सभसे कीमती मानल जालें।

5. उत्पादन तकनीक:

डैन कोंग सोंग झोंग के उत्पादन तकनीक में ऊलोंग चाय बनावे के पारंपरिक तरीका आ चाओझोउ क्षेत्र के ख़ास विशेषता मिलल बा।

  • तुड़ाई (采摘 - cǎi zhāi): ऊपर बतावल गइल बा।
  • मुरझाई (萎凋 - wěidiāo): तूरल पत्ता के खुला हवा में (धूप भा छाँह में मुरझाई) भा भीतरी भाग में कई घंटा तक फइला दिहल जाला। मकसद होला पत्ता से नमी के कुछ हिस्सा हटा के ओकरा नरम बनावल आ किण्वन प्रक्रिया शुरू करावल।
  • हलका हिलावल (摇青 - yáo qīng): पत्ता के बाँस के थाली पर हलके हाथ से हिलावल-डुलावल आ पलटल जाला। ई चरण कई बेर दोहरावल जाला, बीच-बीच में पत्ता के “आराम” देवे खातिर रोकल जाला। सोंग झोंग खातिर हिलावल आमतौर पर सावधानी से कइल जाला ताकि पत्ता बरकरार रहे।
  • किण्वन (发酵 - fājiào): ऑक्सीकरण प्रक्रिया, जवन हिलावल आ “आराम” देला के दौरान होला। सोंग झोंग के किण्वन के स्तर आमतौर पर मध्यम (30–60%) होला, बाकी उत्पादक आ मनचाहा स्वाद-प्रोफाइल के हिसाब से बदल सकेला।
  • ‘हरियाली के मारल’ (杀青 - shā qīng): किण्वन प्रक्रिया रोके खातिर ऊँच तापमान पर भुनाई।
  • बेंटाई (揉捻 - róuniǎn): पत्ता के लंबाई में बेंट के आकार दिहल जाला। बेंटाई हाथ से भा मशीन से दुनो तरह से हो सकेला।
  • सुखाई (烘干 - hōnggān): नमी हटावे खातिर चाय के सुखावल जाला। एह चरण में मनचाहा स्वाद-प्रोफाइल के हिसाब से हलुक भा तेज़ भुनाई कइल जा सकेला। कब्बो-कब्बो बीच-बीच में “आराम” देवत बहु-बेर भुनाई के इस्तेमाल होला।
  • छँटाई (分级 - fēnjí): तइयार चाय के आकार आ गुणवत्ता के हिसाब से छाँटल जाला।

6. ऑर्गेनोलेप्टिक विशेषता:

  • सूखा पत्ता के बाहरी रूप: तुलनात्मक रूप से बड़, लंबाई में बेंटल पत्ता, गहिरा भूअर, भुअर रंग में लालाहूँ आभा लिहले। डंठल हो सकेला। कब्बो-कब्बो सोनहर रोआँ से ढँकल टिप्स देखाई पड़ेलीं।
  • सूखा पत्ता के सुगंध: बहुत समृद्ध, भरपूर, गहिर, फूलन (ऑर्किड, गार्डेनिया), फलन (आड़ू, लीची, लोंगन), शहद, मसाला, लकड़ी के सूक्ष्म अंश के नोट के साथे। भुनाई, मेवा, कैरामेल के नोट हो सकेलें। सोंग झोंग के सुगंध के अक्सर जटिल, बहुआयामी, “बुजुर्गनुमा” बतावल जाला।
  • अर्क के सुगंध: तीव्र, लपेट लेवे वाला, मीठ, फूल-फल के प्रमुख नोट, शहद, मसाला के आभा, कब्बो-कब्बो हलुक खटाई के साथे।
  • स्वाद: भरभार, भरपूर, तेलियाहट लिहले, मीठ सुआद वाला, हलुक कड़वाहट आ ताज़गी भरल खटाई के साथे। गुलदस्ता में फूल, फल आ शहद के नोट प्रमुख होलें, मसाला, मेवा, लकड़ी के बारीक अंश के साथे, लमहर, मीठ बाद-स्वाद छोड़त। सोंग झोंग के स्वाद खास गहिराई आ जटिलता लिहले होला, जवन बारीक अंश धीरे-धीरे खुलत जालें।
  • अर्क के रंग: सोनहर-पीयर से लेके कहरुवा-संतरी आ लाल-भूअर ले, पारदर्शी, साफ। अर्क के रंग किण्वन आ भुनाई के स्तर पर निर्भर करेला।
  • चाय के गाद (पकोइल पत्ता): पूरा, लचीला पत्ता, जवन पकावे के बाद खुल जालें, भूअर-हरियर रंग के लाल किनारा आ नस नियर धारी के साथे।

7. रासायनिक संरचना:

डैन कोंग सोंग झोंग में भरपूर बा:

  • पॉलीफेनॉल (कैटेचिन): एंटीऑक्सीडेंट।
  • अमीनो एसिड: एकरा में L-थिएनिन भी सामिल बा।
  • एल्कलॉइड: कैफीन, थियोब्रोमिन, थियोफिलिन।
  • वाष्पशील तेल: चाय के समृद्ध सुगंध खातिर जिम्मेदार वाष्पशील तेल के ऊँच मात्रा।
  • विटामिन: C, समूह B, E, K।
  • खनिज: पोटैशियम, फ्लोरीन, मैग्नीशियम, मैंगनीज, लोहा।

8. लाभकारी गुण:

  • टॉनिक प्रभाव: स्फूर्ति देला, थकान मिटावेला, कार्यक्षमता बढ़ावेला, एकाग्रता सुधारेला।
  • एंटीऑक्सीडेंट असर: कोशिका के फ्री रैडिकल से होखे वाला नोकसान से बचावेला, बुढ़ापा के प्रक्रिया धीमा करेला।
  • पाचन में सुधार: पाचन के उत्तेजित करेला, भोजन के अवशोषण में मदद करेला।
  • गरमाहट के असर: ठंडा मौसम में बढ़िया से गरमाहट पहुँचावेला।
  • हृदय-रक्तवाहिका तंत्र: “खराब” कोलेस्ट्रॉल के स्तर घटावे, रक्तवाहिनी के देवार मजबूत करे में सहायक हो सकेला।
  • आरामदेह प्रभाव: टॉनिक असर के बावजूद, चाय में मौजूद सुगंध आ L-थिएनिन आराम आ तनाव दूर करे में सहायक होलें।
  • मूड सुधार: सामंजस्य, खुशी आ आनंद के अनुभव करावेला।

9. पकावे के तरीका:

  • पानी के तापमान: 90–95°C (अधिकतर किसिम खातिर)।

  • चाय के मात्रा: 150–200 मिली पानी पर 5–7 ग्राम।

  • बर्तन: आदर्श रूप से गाइवान (ढक्कन वाला पारंपरिक चीनी प्याला) भा यिशिंग माटी के माटी के केतली उपयुक्त बा। चीनी माटी के बर्तन भी इस्तेमाल कइल जा सकत बा।

  • प्रक्रिया:

    1. बर्तन गरम करीं: गाइवान भा केतली के उबलत पानी से खंगार लीं।
    2. चाय धुआई (झटपट भर के): चाय गाइवान में राखीं, थोड़िके गरम पानी भरीं आ फौरन पानी बहा दीं।
    3. पहिला पकाव: चाय पर गरम पानी (90–95°C) भर के कुछ सेकेंड से 1 मिनट ले (पहिला भराई) रखीं। पहिला पकाव के समय बहुत कम हो सकेला, शाब्दिक रूप से 5–15 सेकेंड।
    4. अर्क प्यालन में बाँटीं: गाइवान भा केतली से अर्क पूरा तरह चाहाई (निकास पात्र) में निकाल लीं, फेर प्यालन में बाँट दीं।
    5. बार-बार पकाव: डैन कोंग सोंग झोंग के कइयो बेर (7–10 बेर, कब्बो-कब्बो अउरी बेसी) पकावल जा सकेला, हर बाद के भराई के साथे 10–30 सेकेंड धीरे-धीरे समय बढ़ावत जाईं। हर भराई के साथे चाय के स्वाद आ सुगंध बदलत रही, नया पहलू खोलत जाई।

महत्त्वपूर्ण बारीक बात:

  • बेसी देर ना रखीं: बहुत देर ले रखले से चाय के स्वाद कड़वा आ तीखा हो सकेला।
  • चाय के सुनीं: आपन अनुभव के हिसाब से चलीं आ मनचाहा तेज़ी के हिसाब से पकावे के समय घटा-बढ़ा लीं।
  • चाय के देखीं: अर्क के रंग, सुगंध, चाय के पत्ता के खुले पर ध्यान दीं।

10. भंडारण:

डैन कोंग सोंग झोंग के सूखा, अँधियार, ठंढा जगह पर, एयरटाइट डिब्बा (सिरेमिक, चीनी माटी, काँच भा टीन के डिब्बा) में, बाहरी गंध से दूर रखे के चाहीं। 11. कीमत आ नकली:

डैन कोंग सोंग झोंग महँग, विशिष्ट चाय में आवेला, खासकर जब पुरान पेड़ (“लाओ कोंग”) के चाय के बात होखे। एकर कीमत बहुत बड़ा दायरा में बदल सकेला, 100 ग्राम के कुछ दर्जन डॉलर से लेके ओही वजन के कई सौ डॉलर ले, आ कब्बो-कब्बो ओकरा से बहुत बेसी, इ निर्भर करेला:

  • झाड़ी के उमिर: पुरान झाड़ी (“लाओ कोंग”) के चाय के बहुत बेसी मान दिहल जाला। खास तौर पर अलग-अलग, बहुत पुरान आ प्रसिद्ध पेड़ से तूरल नमूना के बहुत तवज्जो दिहल जाला।
  • उगवे के ऊँचाई: ऊँच पहाड़ी चाय (1000 मीटर से ऊपर) बेसी महँग होला।
  • कच्चा माल के गुणवत्ता: चुनल कली आ जवान पत्ता इस्तेमाल भइल बा भा बेसी पाकल कच्चा माल।
  • उत्पादक के कौशल: जवन चाय मास्टर चाय बनवले बाड़न, ओकर अनुभव आ प्रतिष्ठा कीमत पर खासा असर डालेला।
  • भुनाई के स्तर आ गुणवत्ता: अनुभवी कारीगर द्वारा कोयला पर हाथ से भुनाई चाय के कीमत काफी बढ़ा देला।
  • दुर्लभता: सोंग झोंग एगो दुर्लभ चाय हवे, आ एकर कुछ किसिम, जइसे अलग-अलग पुरान पेड़ से, अउरी दुर्लभ आ ओही हिसाब से महँग बाड़ें।
  • माँग: डैन कोंग के ऊँच माँग भी कीमत पर असर डालेला।

ऊँच कीमत आ लोकप्रियता के कारण, बजार में दुर्भाग्य से ढेर नकली आ नकल मौजूद बा। नकली से कइसे बचीं:

  • खाली भरोसेमंद बिक्रेता से खरीदीं: अइसन ख़ास चाय के दुकान खोजीं जिनकर प्रतिष्ठा बढ़िया होखे, जवन आपन गाहकन के कदर करेलीं आ चाय के उत्पत्ति, तुड़ाई के बरिस, उत्पादक के बारे में विश्वसनीय जानकारी दे सकेलीं। उ लोग एकर असलियत आ गुणवत्ता के गारंटी भी देबे के चाहीं।
  • बहुत कम कीमत से सावधान रहीं: संदिग्ध रूप से कम कीमत लगभग हमेशा नकली के पक्का निशानी होला। असली डैन कोंग सोंग झोंग सस्ता ना हो सकेला।
  • बाहरी रूप के ध्यान से परखीं: पत्ता के आकार, रंग, पूरापन पर ध्यान दीं। उ हालाँकि ऊपर दिहल गइल विवरण के अनुरूप होबे के चाहीं। बहुत सारा टूटल पत्ता, धूरि, बाहरी मिलावट के मौजूदगी कम गुणवत्ता भा नकली के निशानी हवे।
  • सुगंध के आँकलन करीं: सूखा चाय में फूल, फल, शहद, मसाला के ख़ास नोट के साथे भरपूर, जटिल सुगंध होबे के चाहीं। कमजोर, फीका, बसाहट भा बाहरी गंध वाली चाय से बचीं। बनावटी सुगंध, जवन कब्बो-कब्बो बेईमान बिक्रेता इस्तेमाल करेलें, आमतौर पर बहुत तीखा, अप्राकृतिक गंध से पकड़ा जाला।
  • अर्क आ चाय के गाद के परखीं: अर्क के रंग सोनहर-पीयर से लेके कहरुवा-संतरी भा लाल-भूअर, पारदर्शी होबे के चाहीं। चाय के गाद में पूरा, लचीला पत्ता होबे के चाहीं।
  • डैन कोंग सोंग झोंग “लाओ कोंग” (पुरान पेड़ से) खरीदत समय खास सावधान रहीं: सीमित उत्पादन मात्रा आ ऊँच माँग के कारण, प्राचीन पेड़ से चाय के सभसे ढेर नकली बनावल जाला।

12. रोचक तथ्य:

  • दीर्घजीवी चाय: मानल जाला कि डैन कोंग सोंग झोंग उ चुनल चाय किसिमन में से एक हवे, जवन अइसन झाड़ियन से आवेला, जिनकर उमिर 600–900 बरिस तक पहुँच सकेला।
  • जीवंत किंवदंती: ई चाय कथा-कहानियन से घेराइल बा, जवन एके पारखी लोग खातिर अउरी आकर्षक बनावेला।
  • ध्यान खातिर चाय: आपन समृद्ध स्वाद, सुगंध आ टॉनिक असर के कारण, डैन कोंग सोंग झोंग के अक्सर चाय समारोह आ ध्यान खातिर इस्तेमाल कइल जाला।
  • खानपान संग जोड़ी: डैन कोंग सोंग झोंग पुरान पनीर, मेवा, सूखा मेवा, आ कैंटोनीज़ भोजन के साथे बढ़िया से मेल खाला।

13. अन्य डैन कोंग से तुलना:

  • मी लान श्यांग (蜜兰香 – “शहद आर्किड के सुगंध”): शायद सभसे प्रसिद्ध डैन कोंग। मी लान श्यांग, आमतौर पर अउरी स्पष्ट शहद-फूल के नोट वाला होला, जबकि सोंग झोंग के सुगंध अउरी जटिल आ गहिर होला, फल, मसाला आ लकड़ी के बारीक अंश के साथे।
  • या शी श्यांग (鸭屎香 – “बत्तख के बीट के सुगंध”): या शी श्यांग एगो चटक फूल के सुगंध से अलग पहिचानल जाला, जवन अक्सर गार्डेनिया से तुलना होला, साथे मलाई जइसन नोट। जबकि सोंग झोंग एगो बेसी “बुजुर्गनुमा”, जटिल सुगंध वाला होला जेह में फल-मसाला आ लकड़ी के नोट प्रमुख होलें।
  • शिंग रेन श्यांग (杏仁香 – “बादाम के सुगंध”): एह डैन कोंग में खास बादाम के सुगंध होला, जवन एके सोंग झोंग से अलग करेला, जहाँ बादाम के नोट कमजोर होलें।

14. शरीर पर असर आ चाय के ऊर्जा (चा ची – 茶氣):

  • चा ची (茶氣): स्वाद आ सुगंध के अलावा, चीन में चाय के पारखी तथाकथित “चा ची” – चाय के ऊर्जा, शरीर आ चेतना पर ओकर असर – पर ध्यान देलें। मानल जाला कि डैन कोंग सोंग झोंग, खासकर पुरान पेड़ से, शक्तिशाली बाकी फेरो कोमल आ सामंजस्यपूर्ण चा ची वाला होला।
  • अनुभूति: अनुभवी चाय प्रेमी सोंग झोंग के असर के वर्णन अइसन करेलें:
    • गरमाहट पहुँचावे वाला: चाय गरमी के एगो अइसन अनुभूति देला जवन पूरा शरीर में फइल जाला।
    • टॉनिक: ताकत, स्फूर्ति, मानसिक स्पष्टता देला, एकाग्रता सुधारेला।
    • ध्यानमूलक: आराम, शांति, आंतरिक सामंजस्य खातिर सहायक।
    • ऊर्जादायक: ऊर्जा से भर देला, बाकी अतिउत्तेजित ना करेला।

महत्त्वपूर्ण: चा ची के अनुभव एगो व्यक्तिपरक अनुभव हवे, जवन अलग-अलग लोग में अलग-अलग हो सकेला। अंत में:

डैन कोंग सोंग झोंग एगो पौराणिक चाय हवे, डैन कोंग सभ में से एगो सभसे दुर्लभ, कीमती आ सम्मानित। एकर बहुआयामी सुगंध फूल, फल, शहद आ मसाला के नोट के साथे, लकड़ी आ सूखा मेवा के आभा वाला गहिर, भरपूर स्वाद, आ शरीर पर शक्तिशाली बाकी सामंजस्यपूर्ण असर एके चाय के पारखी लोग खातिर एगो सच्चा खजाना बनावेला। असली डैन कोंग सोंग झोंग, खासकर पुरान पेड़ से, चखे के मतलब हवे इतिहास के छुअल, फेंगहुआंग पर्वत के ऊर्जा के महसूस कइल आ अतुलनीय चाय के आनंद लिहल। ई ख़ास मौकन खातिर, आराम से, सोच-समझ के चाय पिये खातिर चाय हवे, जब चितन में डूबे के मन होखे, हर घूँट, स्वाद आ सुगंध के हर बारीकी के आनंद लेवे के होखे, आ चाय के पत्ता हमनी के जवन सच्चा गहिराई आ बुद्धिमत्ता देवे में सक्षम बा, ओकरा के खोजे खातिर होखे।

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