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title: "जिउहुआ फू चा"
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updated: 2026-04-08
source: THE TEA — encyclopedia of Chinese tea (https://thetea.app)
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# जिउहुआ फू चा (九华佛茶, Jiǔhuá fúchá)

जिउहुआ फू चा (九华佛茶, Jiǔhuá fúchá — 'नौ रंगों के पर्वत का बौद्ध चाय') — ऐतिहासिक हरा चाय है जो पवित्र पर्वत जिउहुआशान (九华山) से आता है — जो चीन के चार महान बौद्ध पर्वतों में से एक है, बोधिसत्व दिज़ांग (地藏菩萨, Dìzàng Púsà, संस्कृत: क्षितिगर्भ) का निवास। इस चाय का इतिहास कोरियाई भिक्षु जिन दिज़ांग (金地藏, Jīn Dìzàng) से जुड़ा है — जिन्हें किम क्योगाक (金乔觉, Jīn Qiáojué) के नाम से भी जाना जाता है, सिल्ला राज्य के राजकुमार — जिन्होंने तांग राजवंश के कैयुआन (开元, 713–741) काल में कोरिया से चाय के बीज लाकर जिउहुआशान की ढलानों पर रोपे थे। चाय का प्रारंभिक नाम 'जिनदीचा' (金地茶, 'सुनहरी धरती की चाय') था। दक्षिणी सोंग काल में, प्रसिद्ध विद्वान झोउ बिदी (周必大, Zhōu Bìdà) ने अपनी 'नौ रंगों के पर्वत की यात्रा के वृत्तांत' (九华山录, Jiǔhuáshān Lù) में स्थानीय चाय को सर्वोच्च प्रशंसा दी: 'स्वाद में बेइयुआन से कम नहीं' (味敌北苑) — अर्थात, उन्होंने इसे सोंग राजवंश के शाही चाय-अर्पण के समकक्ष रखा।

**1. वर्गीकरण और उत्पत्ति:**

*   **प्रकार:** हरी चाय (अकिण्वित)। दो रूपों में उत्पादित: सपाट (扁直形, biǎnzhí xíng — 'सपाट-सीधा, बुद्ध के हाथ जैसा') और सर्पिलाकार (卷曲形, juǎnqū xíng)। प्रौद्योगिकी: भूनकर-तापकर।
*   **श्रेणी:** अनहुई का ऐतिहासिक प्रसिद्ध चाय (安徽历史名茶)। पंजीकृत प्रमाणन व्यापार चिह्न (证明商标, 2003)। 'हुआंगशीसी माओ फ़ेंग' (黄石溪毛峰) किस्म को 1915 की पनामा-प्रशांत प्रदर्शनी में स्वर्ण पदक मिला।
*   **उत्पत्ति:** चीन, अनहुई प्रांत (安徽, Ānhuī), चिझोऊ शहर (池州市, Chízhōu Shì), क़िंगयांग ज़िला (青阳县, Qīngyáng Xiàn)। उत्पादन क्षेत्र: जिउहुआशान पर्वत और सम्पूर्ण जिउहुआशान पर्वतमाला, जिसमें क़िंगयांग ज़िले और शिताई ज़िले (石台县) के निकटवर्ती क्षेत्र शामिल हैं। टेरुआर का केन्द्र: **शियामिनयुआन (下闵园)**, **दागुलिंग (大古岭)**, **हुआंगशीसी (黄石溪)** और **मियाओच्यान (庙前)**। विशेष रूप से दो शैलीगत धाराएँ उभरती हैं: हुआंगशीसी माओ फ़ेंग (黄石溪毛峰) — 'चेस्टनट प्रकार' (栗[香型](https://thetea.app/hi/article/xiangxing)) और मिनयुआन माओ फ़ेंग (闵园毛峰) — 'ऑर्किड प्रकार' (兰花香型)।
*   **भौगोलिक निर्देशांक:** लगभग 30°29′ उत्तरी अक्षांश, 117°48′ पूर्वी देशांतर।

**2. इतिहास और सांस्कृतिक महत्व:**

*   **इतिहास:** जिउहुआशान पर चाय की खेती का आरंभ एक पौराणिक व्यक्तित्व — **जिन दिज़ांग (金地藏)** से जुड़ा है, जो सिल्ला राज्य (新罗, वर्तमान कोरिया) के राजकुमार किम क्योगाक (金乔觉, 696–794) थे। कथा के अनुसार, तांग राजवंश के कैयुआन (开元, 713–741) काल में युवा किम क्योगाक बौद्ध धर्म का अध्ययन करने चीन आए, जिउहुआशान पर्वत पर बस गए और अपने साथ लाए चाय के बीज रोप दिए। 'जिनदीचा' (金地茶, 'सुनहरी धरती की चाय') नामक यह चाय मठवासी जीवन का अभिन्न अंग बन गई।

    सोंग युग में, जिउहुआशान की चाय को साहित्यिक कीर्ति मिली: विद्वान और राजनेता **झोउ बिदी (周必大, 1126–1204)** ने 'नौ रंगों के पर्वत की यात्रा के वृत्तांत' (九华山录) में लिखा कि यहाँ की चाय 'स्वाद में बेइयुआन से कम नहीं' (味敌北苑, wèi dí Běiyuàn) है। 'बेइयुआन' (北苑) — सोंग राजवंश का पौराणिक शाही चाय बाग़ था, जो फ़ूज्यान में स्थित था और दरबार के लिए श्रेष्ठ 'गोंगचा' (贡茶) उत्पन्न करता था। यह तुलना — सर्वोच्च प्रशंसा थी, जो यह संकेत देती है कि जिउहुआशान की चाय शाही चाय के समकक्ष खड़ी है।

    मिंग और क़िंग राजवंशों में, यह चाय पूरे देश में प्रसिद्ध हो गई। महान औषधिशास्त्री ली शिझेन (李时珍, Lǐ Shízhēn, 1518–1593) ने 'बेनचाओ गांगमु' (本草纲目, 'औषधीय पदार्थों का संकलन') में उल्लेख किया: 'चिझोऊ का जिउहुआशान — प्रसिद्ध चाय-उत्पादक क्षेत्र' (池州之九华产茶有名)।

    20वीं सदी में: 1915 में हुआंगशीसी माओ फ़ेंग (黄石溪毛峰) किस्म को पनामा प्रदर्शनी में स्वर्ण पदक मिला। 1983–1986 में ऐतिहासिक नाम 'दोंगयाई च्यूशे' (东崖雀舌, 'पूर्वी चट्टान की गौरैया जीभ') और 'जिनदीचा' (金地茶) को पुनर्जीवित किया गया। 2003 में प्रमाणन व्यापार चिह्न '九华佛茶' पंजीकृत हुआ, जिसने पर्वत की सभी चायों को एक ब्रांड के अंतर्गत एकीकृत कर दिया।

*   **नाम:**
    *   'जिउहुआ' (九华) — 'नौ रंग' (या 'नौ भव्यताएँ'): महान तांग कवि ली बाई (李白, Lǐ Bái) द्वारा पर्वत को दिया गया काव्यात्मक नाम, जो कमल के फूलों जैसे दिखने वाले नौ शिखरों से प्रेरित था।
    *   'फू' (佛) — 'बुद्ध': बौद्ध उत्पत्ति और मठवासी संस्कृति से संबंध दर्शाता है।
    *   'चा' (茶) — 'चाय'।

*   **सांस्कृतिक महत्व:** जिउहुआ फू चा — चीन के चार महान बौद्ध पर्वतों (四大佛教名山) में से एक से अटूट रूप से जुड़ा चाय है — यह लाखों श्रद्धालुओं का तीर्थस्थल है। बोधिसत्व दिज़ांग (क्षितिगर्भ) — पाताल लोक के संरक्षक और मृतकों के हिमायती — जिउहुआशान पर्वत के 'स्वामी' हैं, और इस पर्वत की चाय का विशेष आध्यात्मिक दर्जा है। कोरियाई राजकुमार-भिक्षु किम क्योगाक का जिउहुआशान पर चाय की खेती की नींव रखना — कोरियाई-चीनी बौद्ध सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक अद्वितीय उदाहरण है।

**3. वानस्पतिक वर्णन और कच्चा माल:**

*   **किस्म / कल्टीवार:** स्थानीय देशज आबादी *Camellia sinensis* var. *sinensis* — **जिउहुआशान युआनशेंग च्युनतिझोंग (九华山原生[群体种](https://thetea.app/hi/article/qunti-zhong))** — 'जिउहुआशान की देशज आबादी'। झाड़ियाँ उच्च-पर्वतीय जलवायु के अनुकूल हैं; कलियाँ और अंकुर गूदेदार, प्रचुर रोमयुक्त (芽叶肥厚多毫) होते हैं।
*   **तुड़ाई:** आरंभिक बसंत। सर्वोच्च श्रेणी के लिए — एक कली और एक पत्ती, जो खिलने की प्रारंभिक अवस्था में हो (一芽一叶初展, ≥80%)। प्रथम श्रेणी के लिए — एक कली और एक पत्ती (60–80%)। द्वितीय के लिए — एक कली और दो पत्तियाँ (60–80%)। तृतीय के लिए — एक कली और दो-तीन पत्तियाँ (40–60%)।
*   **कच्चे माल की आवश्यकताएँ:** कोमल, गूदेदार, एकरूप अंकुर। उच्च श्रेणियों के लिए — 'युग्म पत्तियाँ' (对夹叶, duìjiā yè — बिना कली की पत्तियाँ) नहीं होनी चाहिए। प्रसंस्करण — तुड़ाई के दिन ही।

**4. टेरुआर और उत्पादन की विशेषताएँ:**

*   **पवित्र पर्वत:** जिउहुआशान — एक पर्वत श्रृंखला है जिसके मुख्य शिखर 1000 मीटर से ऊपर हैं, दक्षिणी अनहुई में स्थित। पर्वतीय स्थलाकृति — तीव्र ढलान, गहरी घाटियाँ, अनेक झरने और जलधाराएँ। परिदृश्य — 'पर्वतीय बौद्ध' टेरुआर का उत्कृष्ट उदाहरण है।
*   **जलवायु:** गर्म और आर्द्र, प्रचुर वर्षा और बारंबार बादलों के साथ। दैनिक तापांतर — महत्वपूर्ण। कीट और औद्योगिक प्रदूषण — वस्तुतः अनुपस्थित। चाय बागान — वास्तव में 'प्राकृतिक-जैविक' (天然有机) हैं।
*   **मृदाएँ:** ग्रेनाइट और स्लेट चट्टानों (花岗岩或页岩风化母质) पर विकसित। अम्लीय, उपजाऊ, अच्छी वायु-संचरण वाली। सघन वनस्पति (林木葱茏, 'वनों का हरा मंडप') और पर्वतीय पुष्प (杂花生树) एक अनूठा पारितंत्र सृजित करते हैं।
*   **उत्पादन ऊँचाई:** चाय बागान विभिन्न ऊँचाइयों पर स्थित हैं — 400 से 1000+ मीटर तक। सर्वोत्तम गुणवत्ता — हुआंगशीसी, दागुलिंग और मिनयुआन के उच्च-पर्वतीय बागानों से आती है।

**5. उत्पादन प्रौद्योगिकी:**

जिउहुआ फू चा की प्रौद्योगिकी में आठ चरण शामिल हैं। मुख्य विशेषता — सीधा करने वाली मशीन पर दोहरा आकार देना (理条机分二次理条) और उसके बाद हाथ से 'चपटा करना' (手工压扁)।

*   **तुड़ाई (鲜叶采摘 — xiānyè cǎizhāi):** 'एक कली और एक-दो पत्तियाँ प्रारंभिक अवस्था में' मानक के अंतर्गत बसंतकालीन हाथों से तुड़ाई।
*   **बिछाना (摊青 — tān qīng):** मुरझाने के लिए अल्पकालिक बिछाना।
*   **स्थिरीकरण (杀青 — shāqīng):** 150–160°C पर — कोमल भूनना, जिससे कोमलता और रोम सुरक्षित रहते हैं।
*   **ठंडा करना (摊凉 — tānliáng):** नमी का पुनर्वितरण।
*   **आकार देना (做形 — zuòxíng):** सीधा करने वाली मशीन पर दोहरा सीधा करना (理条机分二次理条) + हाथ से चपटा करना (手工压扁)। इसी चरण में सपाट आकार 'बुद्ध के हाथ' ([佛手](https://thetea.app/hi/article/fo-shou)状, fóshǒu zhuàng) जैसी विशेषता ग्रहण करता है।
*   **प्राथमिक सुखाना (毛火 — máohuǒ):** 120–130°C पर — त्वरित आंशिक सुखाना।
*   **अंतिम सुखाना (足火 — zúhuǒ):** 100–120°C पर — स्थायी अवस्था तक पहुँचाना। सुगंध विकास (提香) — तब तक जब तक अंकुर तना मोड़ने पर टूटने न लगें (茶条折梗即断)।
*   **चुनना और पैकिंग (拣剔→包装 — jiǎntī → bāozhuāng):** अंतिम हस्त चयन।

**6. ऑर्गनोलेप्टिक विशेषताएँ:**

*   **सूखी पत्ती का बाह्य रूप:** सपाट आकार — सीधी, एकसमान पत्तियाँ, 'बुद्ध के हाथ' जैसी (扁直呈佛手状)। रंग — पन्ना हरा, हल्के पीलेपन के साथ (翠绿带黄)। सर्पिलाकार आकार — गहरे हरे रंग के घने छल्ले (墨绿)।
*   **सूखी पत्ती की सुगंध:** ऑर्किड की सुगंध (兰花香, lánhuā xiāng), फल सुगंध (果香, guǒxiāng), चेस्टनट सुगंध (栗香, lìxiāng)। दो शैलीगत दिशाएँ: हुआंगशीसी — चेस्टनट प्रकार (栗香型); मिनयुआन — ऑर्किड प्रकार (兰花香型)।
*   **अर्क की सुगंध:** उच्च और स्थायी (香高味醇)। पहले प्रवाह में ऑर्किड-फल, बाद में चेस्टनट।
*   **स्वाद:** ताज़ा और रसदार (鲜爽, xiānshuǎng), सघन और गाढ़ा (醇厚, chúnhòu), स्पष्ट पुनरागत मिठास के साथ (回甘, huígān)। बाद का स्वाद — लंबा, शुद्ध।
*   **अर्क का रंग:** पन्ना हरा, चमकदार और पारदर्शी (碧绿明亮)।
*   **चाय की तली:** कोमल, एकरूप हरे अंकुर।

**7. रासायनिक संघटन:**

उच्च-पर्वतीय उत्पत्ति, ग्रेनाइट मृदा और पारिस्थितिक शुद्धता प्रोफ़ाइल निर्धारित करती है:

*   **पॉलीफ़ेनॉल (कैटेचिन):** महत्वपूर्ण मात्रा। प्रतिऑक्सीकारक क्षमता प्रदान करते हैं।
*   **अमीनो अम्ल (जिनमें L-थीनाइन):** उच्च सामग्री — पर्वतीय विसरित प्रकाश और समृद्ध मृदाओं का परिणाम।
*   **एल्केलॉइड:** कैफ़ीन — मध्यम मात्रा।
*   **विटामिन:** विटामिन C, कैरोटीनॉइड।
*   **खनिज:** पोटैशियम, मैग्नीशियम, ज़िंक, मैंगनीज़ — प्रोफ़ाइल ग्रेनाइट और स्लेट चट्टानों द्वारा निर्धारित होती है।

**8. लाभकारी गुण:**

*   **टॉनिक प्रभाव (提神):** कैफ़ीन और L-थीनाइन।
*   **शीतलन और विषहरण प्रभाव (清热解毒):** पारंपरिक गुण।
*   **पाचन सुधार (消食):** एंज़ाइम उत्तेजना।
*   **मूत्रवर्धक प्रभाव (利尿):** थियोब्रोमीन और थियोफ़िलीन।
*   **प्रतिऑक्सीकारक क्रिया:** कैटेचिन।

*   **महत्वपूर्ण:** उल्लिखित गुण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं और चिकित्सीय सलाह नहीं हैं।

**9. चाय बनाना:**

*   **जल का तापमान:** 80–85°C।
*   **चाय की मात्रा:** 2 ग्राम प्रति 100 मिली पानी।
*   **बर्तन:** सफ़ेद चीनी मिट्टी का गाइवान या काँच का गिलास।
*   **प्रक्रिया:**
    1.  बर्तन गरम करें, पानी फेंक दें।
    2.  चाय डालें।
    3.  पहला प्रवाह — 15 सेकंड।
    4.  अगले प्रवाहों में 10 सेकंड बढ़ाएँ। चाय 4-5 बार बनाई जा सकती है।
*   **टिप्पणी:** बौद्ध परंपरा के अनुसार चखना — तीन चरण: सुगंध सूँघें (闻香 — ऑर्किड और फल), रंग निहारें (观色 — पन्ना चमक), छोटे घूँट लेकर स्वाद लें (品味 — ताज़गी और पुनरागत मिठास)।

**10. भंडारण:**

*   वायुरोधी पात्र में, अंधेरी और ठंडी जगह रखें।
*   सर्वोत्तम — 0–5°C पर रेफ़्रिजरेटर।
*   भंडारण अवधि — 12 माह तक।
*   खोलने के बाद — 1-2 माह के भीतर उपयोग करें।

**11. मूल्य और नकली:**

जिउहुआ फू चा — तीर्थ पर्यटन के कारण बढ़ती लोकप्रियता वाला चाय है। मूल्य श्रेणी, विशिष्ट सूक्ष्मक्षेत्र (हुआंगशीसी, मिनयुआन — अधिक महँगे) और तुड़ाई के समय पर निर्भर करता है।

*   **नकली से कैसे बचें:**
    *   **प्रमाणित विक्रेताओं से खरीदें** जिनके पास प्रमाणन व्यापार चिह्न '九华佛茶' हो।
    *   **दो शैलियों में अंतर करें:** हुआंगशीसी (चेस्टनट प्रकार) और मिनयुआन (ऑर्किड प्रकार) — दोनों प्रामाणिक हैं।
    *   **आकार का मूल्यांकन करें:** सपाट संस्करण — 'बुद्ध का हाथ' — सीधा और समतल; सर्पिलाकार — घना और गहरा हरा।
    *   **सुगंध का मूल्यांकन करें:** ऑर्किड और/या चेस्टनट — विशिष्ट सुगंध हैं। दोनों की अनुपस्थिति — संदेहजनक।
    *   **उत्पत्ति पर ध्यान दें:** प्रामाणिक जिउहुआ फू चा — केवल जिउहुआशान क्षेत्र और निकटवर्ती भागों से।

**12. रोचक तथ्य:**

*   जिउहुआशान पर चाय की खेती के संस्थापक — **किम क्योगाक (金乔觉)**, कोरियाई सिल्ला राज्य के राजकुमार — चीनी चाय के इतिहास के सबसे असाधारण व्यक्तित्वों में से एक हैं। वे 8वीं शताब्दी में बौद्ध धर्म सीखने चीन आए, जिउहुआशान पर 75 वर्ष बिताए, मृत्यु के बाद बोधिसत्व दिज़ांग के अवतार के रूप में संत घोषित हुए और उन्होंने जिउहुआशान को चीन के चार महान बौद्ध पर्वतों में से एक बना दिया। जो चाय वे कोरिया से लाए और पर्वत पर रोपी — वह कोरियाई-चीनी सांस्कृतिक आदान-प्रदान की जीवित विरासत है।
*   झोउ बिदी की टिप्पणी '味敌北苑' — 'स्वाद में बेइयुआन से कम नहीं' — सोंग युग की सर्वोच्च चाय प्रशंसा के समतुल्य है। बेइयुआन (北苑) — फ़ूज्यान का शाही चाय बाग़, सोंग दरबार के लिए सर्वोत्तम 'गोंगचा' उत्पन्न करता था। जिउहुआशान की पर्वतीय चाय को शाही स्तर पर रखना — उसकी पूर्ण उत्कृष्टता की स्वीकृति है।
*   ली शिझेन (李时珍, 1518–1593) — 'बेनचाओ गांगमु' के रचयिता, चीन के महानतम औषधीय ग्रंथ — ने जिउहुआशान को 'प्रसिद्ध चाय-उत्पादक क्षेत्र' के रूप में विशेष रूप से उल्लेखित किया।
*   दो शैलियाँ — हुआंगशीसी (चेस्टनट) और मिनयुआन (ऑर्किड) — एक ही पर्वत पर एक ही कच्चे माल से बनती हैं, पर किसी विशेष ढलान की सूक्ष्मजलवायु और प्रौद्योगिकी की बारीकियों के कारण भिन्न होती हैं। यह 'अंतर्पर्वतीय' शैलीगत विविधता का दुर्लभ उदाहरण है।
*   जिउहुआशान के चाय बागान — वस्तुतः 'प्राकृतिक-जैविक' हैं: औद्योगिक प्रदूषण, कीटों और कीटनाशकों की आवश्यकता का पूर्ण अभाव। बौद्ध पर्वत ने चाय की खेती के लिए आदर्श पारिस्थितिक परिस्थितियाँ निर्मित की हैं।

**13. अन्य 'बौद्ध' और अनहुई की हरी चायों से तुलना:**

*   **जिंग शान चा ([径山茶](https://thetea.app/hi/article/jing-shancha)):** झेजियांग से। यह भी चान मठ का 'बौद्ध चाय' है, और चाय समारोह के इतिहास से भी जुड़ा है। जिंगशान — 'जापानी चाय समारोह का जन्मस्थान'; जिउहुआशान — 'बोधिसत्व दिज़ांग की चाय'। शैली में: जिंगशान — अधिक मरोड़ीदार और चेस्टनट-ऑर्किड प्रधान; जिउहुआ — अधिक सपाट, 'बुद्ध के हाथ' के आकार का।
*   **हुआंगशान माओ फ़ेंग ([黄山毛峰](https://thetea.app/hi/article/huangshan-mao-feng)):** दक्षिणी अनहुई का एक सह-क्षेत्रीय चाय। ऑर्किड सुगंध वाली तापकर बनाई गई 'गौरैया जीभ'। माओ फ़ेंग — अधिक व्यावसायिक रूप से सफल और 'सुरुचिपूर्ण'; जिउहुआ — अधिक 'आध्यात्मिक', बौद्ध आभा से युक्त।
*   **योंगसी हुओ चिंग ([涌溪火青](https://thetea.app/hi/article/yongxi-huo-qing)):** जिंग ज़िले से, वही अनहुई। खुबानी की सुगंध वाला मोती चाय। बिल्कुल भिन्न शैली: हुओ चिंग — गोल दाने, 20-घंटे सुखाना; जिउहुआ — सपाट 'बुद्ध के हाथ', मानक तापकर सुखाना।
*   **एमेइशान झुएचिंग ([峨眉竹叶青](https://thetea.app/hi/article/emei-zhuyeqing)):** एमेइ पर्वत से — एक और बौद्ध तीर्थ (बोधिसत्व पूश्यान)। दोनों — 'बौद्ध पर्वतीय चाय' हैं, पर भिन्न प्रांतों और भिन्न शैली के साथ: झुएचिंग — सपाट 'बाँस का पत्ता'; जिउहुआ — सपाट 'बुद्ध का हाथ'।

**अंत में:**

जिउहुआ फू चा — एक ऐसा चाय है जिसमें बौद्ध पवित्रता, कोरियाई-चीनी इतिहास और अनहुई की कारीगरी नौ रंगों के पर्वत की ढलानों पर एकाकार हुई है। कोरियाई राजकुमार-भिक्षु, जो एक हज़ार वर्ष पूर्व चाय के बीज लेकर आए; सोंग विद्वान, जिन्होंने पर्वतीय चाय को शाही स्तर का बताया; 'बुद्ध के हाथ' के आकार की सपाट पत्तियाँ, जो शुद्धतम पन्ना अर्क में ऑर्किड-चेस्टनट की सुगंध प्रकट करती हैं — यह सब जिउहुआ फू चा को चीन की सर्वाधिक आध्यात्मिक चायों में से एक बनाते हैं। यह ध्यान और चिंतन का चाय है — उनके लिए जो प्याले में स्वाद के अतिरिक्त शांति भी खोजते हैं।
