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title: "गुचझु ज़िसुन"
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updated: 2026-04-08
source: THE TEA — encyclopedia of Chinese tea (https://thetea.app)
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# गुचझु ज़िसुन (顾渚紫笋, Gùzhǔzǐ sǔn)

गुचझु ज़िसुन (顾渚紫笋, Gùzhǔ Zǐ Sǔn) चीन की सबसे प्राचीन एवं ऐतिहासिक रूप से महत्त्वपूर्ण चायों में से एक है: एक शाही भेंट-चाय (贡茶, gòngchá), जो ८७६ वर्षों—७६३ से १३७५ ई. तक—लगातार दरबार में भेजी जाती रही। इसी चाय को “चाय-ऋषि” लू यू (陆羽, Lù Yǔ) ने चाय-ग्रन्थ (茶经, Chá Jīng) में दो सर्वोच्च मानदंडों—“पर्पल उत्तम, अंकुर उत्तम” (紫者上，笋者上)—पर परखते हुए “चायों में प्रथम” (茶中第一) घोषित किया था। चाय का नाम काव्यात्मक सटीकता रखता है: नवांकुरों में हल्की बैंगनी आभा (紫, zǐ) होती है, तथा मुड़ी हुई पत्तियाँ बाँस के अंकुरों (笋, sǔn) सी लगती हैं।

**1. वर्गीकरण और उत्पत्ति:**

* **प्रकार:** हरी चाय (अकिण्वित)। तकनीक रूप से—अर्ध-भूनी-अर्ध-सुखाई (半炒半烘, bàn chǎo bàn hōng): कड़ाही में भूनाई (炒) और ताप-सुखाई (烘) का संयोजन, जिससे घनी ऐंठन के साथ कोमल, पुष्प-सुगंध एकत्रित होती है।

* **श्रेणी:** चीन के इतिहास में सबसे लंबे अनवरत भेंट काल (८७६ वर्ष, ७६३–१३७५ ई.) वाली ऐतिहासिक भेंट-चाय (贡茶, gòngchá)। १९८२ में इसे “राज्य-स्तरीय प्रसिद्ध चाय” (国家级名茶) का दर्जा पुनः प्राप्त हुआ। भौगोलिक संकेतक उत्पाद।

* **उद्गम:** चीन, झेजियांग प्रान्त (浙江, Zhèjiāng), चांगशिंग जिला (长兴县, Chángxīng Xiàn), गुचझुशान पर्वत (顾渚山, Gùzhǔ Shān)। उत्पादन क्षेत्र में जिले के दक्षिण-पश्चिमी तथा उत्तर-पश्चिमी निम्न-पर्वतीय भाग, गुचझुशान, सांगरुवू (桑孺坞) एवं श्वानजियाओलिंग (悬脚岭) क्षेत्र सम्मिलित हैं।

* **भौगोलिक निर्देशांक:** लगभग ३०°५२′ उत्तरी अक्षांश, ११९°५०′ पूर्वी देशांतर।

**2. इतिहास और सांस्कृतिक महत्त्व:**

* **इतिहास:** गुचझु ज़िसुन का इतिहास चाय-ऋषि (茶圣, chá shèng) लू यू (陆羽, ७३३–८०४) से अभिन्न रूप से जुड़ा है, जिन्होंने मौलिक चाय-ग्रन्थ “चा जिंग” रचा। चांगशिंग में निवास करने वाले लू यू ने गुआंगदे अवधि (广德, ७६३–७६४) में गुचझु पर्वत की चाय की सम्राटीय दरबार को अनुशंसा की—यहीं से अभूतपूर्व भेंट-परम्परा आरंभ हुई।

	७६३ से १३७५ तक (जब मिंग वंश के संस्थापक सम्राट झू युआनझांग (朱元璋) ने चाय-भेंट प्रणाली समाप्त की), गुचझु ज़िसुन अनवरत दरबार भेजा जाता रहा—ये ८७६ वर्ष, अवधि एवं पैमाने की दृष्टि से सभी चीनी भेंट-चायों में कीर्तिमान है। तांग राजवंश में उत्पादन-संगठन राजकीय स्तर तक पहुँचा: गुचझु पर्वत पर विशेष शाही चाय-न्यायालय (贡茶院, Gòngchá Yuàn) स्थापित किया गया; हुझोउ के राज्यपाल (湖州刺史) स्वयं उत्पादन का पर्यवेक्षण करते थे; चाय-संग्रह एवं प्रसंस्करण में ३०,००० से अधिक श्रमिक लगते थे। भेंट-चाय पाँच गुणवत्ता श्रेणियों में बँटती थी, जिनमें प्रथम खेप—“त्वरित प्रेषण चाय” (急程茶, jí chéng chá)—को राजधानी चांगआन में किंगमिंग पर्व से पूर्व पहुँचना अनिवार्य था, ताकि शाही पूर्वज-मंदिर (宗庙, Zōngmiào) में बलि-अर्पण हेतु प्रयोग हो सके।

	मिंग राजवंश के अंत (१७वीं शताब्दी) तक मूल उत्पादन-प्रविधि लुप्त हो चुकी थी। इस चाय का पुनरुत्थान १९७० के दशक के अंत में हुआ, जब स्थानीय कारीगरों ने ऐतिहासिक अभिलेखों व अपने अनुभव से विधि पुनर्जीवित की। १९८२ में पुनर्जीवित गुचझु ज़िसुन को “प्रसिद्ध चाय” के रूप में राजकीय मान्यता मिली।

* **नाम:**

	* “गुचझु” (顾渚)—चांगशिंग जिले में ताइहू झील-तट पर स्थित पर्वत का नाम। यह स्थान-नाम हान राजवंश से चला आ रहा है।
	* “ज़ि” (紫)—“बैंगनी”: नवांकुरों की विशिष्ट हल्की बैंगनी आभा को इंगित करता है। लू यू ने ‘चा जिंग’ में बैंगनी रंग को उच्चतम गुणवत्ता का चिह्न बताया।
	* “सुन” (笋)—“बाँस का अंकुर”: मुड़ी हुई पत्तियों की ताज़ा बाँस-कोंपलों जैसी आकृति का वर्णन करता है।

* **सांस्कृतिक महत्त्व:** गुचझु ज़िसुन चीनी चाय-संस्कृति के इतिहास की एक आधारशिला है। इसी के इर्द-गिर्द चीन की पहली राजकीय चाय-भेंट प्रणाली विकसित हुई। आधुनिक चांगशिंग में तांग-राजवंशीन कर-चाय-भवन (大唐贡茶院, Dà Táng Gòngchá Yuàn) का पुनर्निर्माण हुआ है—एक संग्रहालय-सह-उत्पादन परिसर, जहाँ तांग-काल की दबाई हुई चाय-टिकियों (饼茶, bǐngchá) की तकनीक पुनर्जीवित होती है। यह चाय चांगशिंग का प्रतीक और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का प्रमुख अवयव बनी हुई है।

**3. वानस्पतिक विवरण और कच्ची पत्ती:**

* **किस्म / कृषि-प्ररूप:** *Camellia sinensis* var. *sinensis* की स्थानीय देशज प्रजातियाँ, जो गुचझु पर्वत की परिस्थितियों के अनुकूल हैं। कच्ची पत्ती की विशिष्टता यह है कि नवांकुरों में हल्का बैंगनी (एंथोसायनिन) वर्णक होता है, जो स्थानीय आबादी के विशिष्ट जीनरूप और पर्वतीय सूक्ष्मजलवायु की प्रतिक्रिया से जुड़ा है। इसी बैंगनीपन को लू यू ने श्रेष्ठता का चिह्न माना था।

* **तुड़ाई:** मुख्यतः वसंतकालीन तुड़ाई। उच्चतर श्रेणियों हेतु मानक—“एक कोंपल, साथ में बस खुलती एक पत्ती” (一芽一叶初展)। ५०० ग्राम सूखी चाय तैयार करने में लगभग ३६,००० कोंपलें लगती हैं—उच्च श्रम-गहनता का द्योतक।

* **तुड़ाई-मानक:** कठोर चयन: कोमल, एकसमान अंकुर, बिना खुरदरी पत्तियों या क्षति के। प्रसंस्करण—तुड़ाई के दिन ही।

* **कच्ची पत्ती की आवश्यकता:** विशिष्ट बैंगनी आभा वाली कोंपलें और नई पत्तियाँ। पत्ती रसीली, मांसल, महीन रोमों से ढकी होनी चाहिए।

**4. भू-क्षेत्र (Terroir) और कृषि-विशेषताएँ:**

* **भू-आकृति:** गुचझुशान पर्वत निम्न-पर्वतीय पहाड़ी क्षेत्र में आता है। ढलान मृदु, समृद्ध वनस्पति से आच्छादित। समीप ही ताइहू झील है, जो सूक्ष्मजलवायु प्रभावित करती है।

* **उत्पादन ऊँचाई:** समुद्र-तल से १००–५०० मीटर। भू-क्षेत्र का केंद्र—शुईकोऊ (水口乡) क्षेत्र, गुचझु पर्वत-शिखर (३५५ मी.), जो श्वानजिउजिए (悬臼岕) और झुओशेजिए (斫射岕) घाटियों के बीच स्थित है, पूर्वी ओर ताइहू की ओर खुलता है।

* **जलवायु:** उपोष्ण आर्द्र, मृदु शीतकाल और प्रचुर वर्षा। माध्य वार्षिक तापमान १५.६°C, वार्षिक वर्षा १,३०९ मि.मी.। पर्वत प्रायः बादलों और कुहासे से आच्छादित रहता है, जिससे विसरित प्रकाश रहता है और पत्तियों में अमीनो अम्लों का संचय बढ़ता है।

* **मृदाएँ:** गहरी, उपजाऊ, हल्की अम्लीय (pH ४.५–६.५)। पीली चिकनी-बलुई मिट्टी (黄泥沙土) और “भस्म-मृदा” (香灰土, xiānghuī tǔ) की प्रधानता, जिसमें कार्बनिक पदार्थ विशेष रूप से उच्च (२–७%) होते हैं। केंद्रीय क्षेत्र की “भस्म-मृदा” ही वह प्रमुख कारक मानी जाती है जो सर्वोत्तम माल के विशिष्ट खनिज-प्रोफाइल तथा स्वाद-गहराई निर्धारित करती है।

**5. उत्पादन तकनीक:**

गुचझु ज़िसुन की आधुनिक तकनीक “अर्ध-भूनी-अर्ध-सुखाई” (半炒半烘, bàn chǎo bàn hōng) है: घुमावदार रूप देने के लिए भूनाई और सुगंध स्थायी करने के लिए ताप-सुखाई का संयोग। यह विधि सघन ऐंठन और दृश्य-सौंदर्य को सूक्ष्म, टिकाऊ पुष्प-सुगंध से जोड़ती है।

* **फैलाना व मुरझाना (摊青 — tān qīng):** ताज़ी पत्ती को ठंडे स्थान पर पतली परत में बिछाकर अल्पकालिक मुरझाई की जाती है, जिससे अतिरिक्त नमी हटे और सुगन्ध-पूर्वगामी बनने लगें।

* **‘हरियाली नाश’ / स्थायीकरण (杀青 — shāqīng):** तप्त कड़ाही में भूनकर एंज़ाइमी ऑक्सीकरण रोकना। ताप और गति ऐसी हो कि हरी सुगन्ध एवं बैंगनी वर्णक स्थिर हो जाएँ।

* **रूप-निर्धारण / सीधा करना (理条 — lǐtiáo):** पत्तियों को हाथ से आकार देकर सीधी, सघन आकृति बनाई जाती है, जो बाँस के अंकुरों की याद दिलाती है।

* **मध्यवर्ती ठंडाई (摊凉 — tānliáng):** ठंडा करना और नमी का पुनर्वितरण।

* **प्राथमिक ताप-सुखाई (初烘 — chū hōng):** मध्यम ताप पर सुखाकर नमी घटाना और आकृति स्थायी करना।

* **अंतिम ताप-सुखाई (复烘 — fù hōng):** कम ताप पर स्थाई अवस्था तक अंतिम सुखाई। दोहरी ताप-सुखाई गहरी, स्थायी सुगंध और दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित करती है।

**6. अंग-संवेदी विशेषताएँ:**

* **सूखी पत्ती की बनावट:** सीधे, सघन अंकुर, ‘बाँस-बाण’ जैसे (紧直如笋)। रंग—बैंगनी झलक सहित हरा (असली गुचझु ज़िसुन का विशिष्ट चिह्न)। डुबाने पर पत्तियाँ खिलकर ऑर्किड-पुष्पों (兰花状, lánhuā zhuàng) जैसी आकृति धारण करती हैं।

* **सूखी पत्ती की सुगंध:** स्वच्छ, ताज़ी, स्पष्ट ऑर्किड-स्वर (兰花香, lánhuā xiāng) युक्त। नवांकुरों की कोमल गंध (嫩香, nèn xiāng), बिना घास-जैसी तीक्ष्णता।

* **जल-अर्क की सुगंध:** ऑर्किड-स्वर, टिकाऊ और शिष्ट। स्वच्छ एवं उच्च (清香)। कई बार डुबाने पर भी सुगंध बनी रहती है।

* **स्वाद:** ताज़ा व रसदार (鲜爽, xiānshuǎng), मुलायम एवं गोल (鲜醇, xiānchún), नाज़ुक मिठास (甘醇, gānchún) और रेशमी टेक्सचर (甘滑, gānhuá) युक्त। कसैलापन न्यूनतम, कटुता लगभग अनुपस्थित। बाद का स्वाद लम्बा, स्वच्छ, हल्का मीठा।

* **जल-अर्क का रंग:** कोमल हरा, स्वच्छ और पारदर्शी, सजीव चमकदार।

* **चाय-तल (भीगी पत्ती):** कोमल, खुले हुए अंकुर, ऑर्किड-दलों जैसे। पत्ती हल्की हरी, एकसमान, सुडौल, बिना क्षति।

**7. रासायनिक संरचना:**

प्रचुर मेघाच्छन्नता युक्त निम्न-पर्वतीय उद्गम और कार्बनिक-पदार्थ-समृद्ध असाधारण मृदाएँ रासायनिक प्रोफाइल निर्धारित करती हैं:

* **पॉलीफेनॉल (कैटेचिन):** मध्यम मात्रा—प्रचुर विसरित प्रकाश एवं सौम्य जलवायु का परिणाम। कैटेचिन बिना स्पष्ट कसैलेपन की हल्की संरचनात्मक गहराई प्रदान करते हैं।

* **अमीनो अम्ल (जिनमें L-थीएनिन):** उन्नत मात्रा—मिठास, मुलायमियत और ‘उमामी’ स्वर का प्रमुख कारक। उच्च थीएनिन स्तर कुहासे-भरे सूक्ष्मजलवायु और कार्बनिक-समृद्ध मृदाओं से स्पष्ट होता है।

* **एंथोसायनिन:** नवांकुरों का बैंगनी वर्णक एंथोसायनिनों की उपस्थिति के कारण है—ये फ्लेवोनॉइड यौगिक प्रबल प्रतिउपचायक (एंटीऑक्सीडेंट) गुणों से युक्त होते हैं। हरी चायों में यह गुचझु ज़िसुन की एक विशिष्ट रासायनिक पहचान है।

* **अल्केलॉइड:** कैफ़ीन—मध्यम मात्रा, मृदु स्फूर्तिदायक प्रभाव। थियोब्रोमीन, थियोफ़िलीन।

* **विटामिन:** विटामिन C, B-समूह विटामिन, कैरोटीनॉइड।

* **खनिज:** पोटैशियम, मैग्नीशियम, जिंक, मैंगनीज़—प्रोफ़ाइल गुचझु पर्वत की कार्बनिक-समृद्ध मृदाओं द्वारा निर्धारित।

**8. लाभकारी गुण:**

* **स्फूर्तिदायक प्रभाव एवं मानसिक स्पष्टता (提神益思):** कैफ़ीन और L-थीएनिन का सम्मिलन कोमल, एकाग्र सजगता देता है।
* **थकान मिटाना (消除疲劳):** अमीनो अम्लों एवं अल्केलॉइडों का संयोजन मानसिक और शारीरिक श्रम-पश्चात पुनर्लाभ में सहायक।
* **प्रतिउपचायक क्रिया:** कैटेचिन एवं एंथोसायनिन मुक्त मूलकों को निष्प्रभाव करते हैं।
* **हृदय-संवहनीय संबलन:** पॉलीफेनॉल रक्तवाहिनियों में लचीलापन बढ़ाते हैं (抑制动脉硬化)।
* **पाचन में सुधार (助消化):** पाचक-एंज़ाइमों का स्राव उत्तेजित करता है।
* **ताज़गी प्रभाव:** जल-अर्क प्यास उत्कृष्टता से बुझाता है।

* **महत्त्वपूर्ण:** उल्लिखित गुण सार्वजनिक आँकड़ों पर आधारित हैं, चिकित्सीय सुझाव नहीं हैं।

**9. पानी देना (पकाना):**

* **जल का तापमान:** ८५–९५°C। गुचझु ज़िसुन विरल हरी चायों में से है जिसमें अपेक्षाकृत उच्च डुबाई-ताप (९५°C तक) उपयुक्त होता है, क्योंकि इसकी सघन ऐंठन और मांसल कच्ची पत्ती सहन कर लेती है।

* **चाय की मात्रा:** १५० मि.ली. जल हेतु ३ ग्राम (अनुपात १:५०)।

* **बर्तन:** काँच का गिलास (玻璃杯)—‘बाँस-अंकुरों’ से ऑर्किड-पुष्पों में खिलाव देखने हेतु। सफ़ेद चीनी-मिट्टी की गाइवान (盖碗)—सुगंध के सटीक नियंत्रण हेतु।

* **प्रक्रिया:**
	1. बर्तन को गर्म जल से सेंकें, पानी फेंक दें।
	2. ३ ग्राम चाय डालें।
	3. पहला प्रवाह—२०–३० सैकंड, चाहाई में उड़ेलें।
	4. बाद के प्रवाह—५–१० सैकंड बढ़ाएँ। चाय ४–५ पूर्ण डुबाइयाँ झेलती है।

* **ध्यान दें:** तुरंत बनाएँ और गरम पिएँ—उच्च जलीय तापमान पर ही ऑर्किड-सुगंध पूर्णतया खिलती है। अधिक देर न छोड़ें (“闷泡” से बचें), जिससे कसैलापन बढ़े।

**10. भंडारण:**

* वायुरोधी पात्र में, अंधेरी, शुष्क व ठंडी जगह, बाहरी गंधों से दूर रखें।
* सर्वोत्तम तापमान—०–५°C (रेफ्रिजरेटर), वायुरोधी पैकिंग में।
* शर्तों के पालन पर भंडारण-आयु—१२ मास तक।
* खोलने के पश्चात १–२ मास में उपयोग करने की सलाह।

**11. मूल्य और जालसाज़ी:**

गुचझु ज़िसुन—एक समृद्धतम इतिहास की चाय, किंतु केंद्रीय क्षेत्र (गुचझु पर्वत, शुईकोऊ) का उत्पादन अपेक्षाकृत सीमित। मूल्य ग्रेड, तुड़ाई-समय और उद्गम-क्षेत्र पर निर्भर करता है।

* **जालसाज़ी से बचने के उपाय:**

	* **प्रमाणित विक्रेताओं से खरीदें** जो चांगशिंग जिले से उत्पत्ति पुष्ट कर सकें।
	* **बैंगनी आभा का मूल्यांकन करें:** असली गुचझु ज़िसुन की कोंपलों में हल्की बैंगनी आभा होती है—यह प्राकृतिक एंथोसायनिन वर्णक है, दोष नहीं।
	* **सुगंध की परख:** विशिष्ट ऑर्किड-स्वर, स्वच्छ व ताज़ा। पुष्प-चरित्र की अनुपस्थिति संदेह का कारण है।
	* **खिलने की आकृति जाँचें:** डुबाते समय पत्तियाँ विशिष्ट ‘ऑर्किड-रोज़ेट’ में खिलनी चाहिए।
	* **मूल्य पर ध्यान दें:** संदिग्ध रूप से कम मूल्य—निश्चित जालसाज़ी का संकेत।

**12. रोचक तथ्य:**

* ८७६ वर्ष अनवरत भेंट (७६३–१३७५)—चीनी चाय-इतिहास का परम कीर्तिमान। कोई अन्य चाय इतने लंबे और इस पैमाने पर दरबार में नहीं भेजी गई।

* तांग-काल में “त्वरित प्रेषण चाय” उत्पादन के लिए गुचझु पर्वत पर ३०,००० से अधिक श्रमिक बुलाए जाते थे। हुझोउ के राज्यपाल स्वयं प्रक्रिया का पर्यवेक्षण करते थे—यह सैन्य-अभियान जैसी राजकीय परियोजना थी।

* मौसम की पहली खेप—“急程茶” (jí chéng chá, “त्वरित प्रेषण चाय”)—को चांगशिंग से राजधानी चांगआन (वर्तमान शीआन) तक किंगमिंग पर्व से पहले पहुँचना अनिवार्य था, जिससे शाही बलि-अर्पण हेतु उपयोग हो। दूरी लगभग १,००० कि.मी., समय कुछ दिन। इसके लिए एक विशेष कूरियर सेवा थी।

* चांगशिंग में तांग-राजवंशीन कर-चाय-भवन (大唐贡茶院) का पुनर्निर्माण हुआ है, जहाँ आठवीं-नौवीं सदी की दबाई हुई चाय-टिकियों (饼茶) की तकनीक जीवंत की जाती है—तांग-काल की चाय-संस्कृति से साक्षात्कार का अनुपम अवसर।

* लू यू ने जीवन का बड़ा भाग चांगशिंग में व्यतीत किया और यहीं ‘चा जिंग’ के प्रमुख अध्याय रचे। गुचझु ज़िसुन को चाय-विज्ञान के जनक का “निजी प्रिय” कहा जा सकता है।

**13. अन्य ऐतिहासिक हरी चायों से तुलना:**

* **शी हू लोंग जिंग ([西湖龙井](https://thetea.app/hi/article/xihu-longjing)):** चपटी पत्ती, शाहबलूत-दाल जैसी सुगंध। लोंग जिंग सत्रहवीं शताब्दी से “गोंगचा” है, गुचझु ज़िसुन आठवीं शताब्दी से। शैली में: लोंग जिंग संरचनात्मक और ‘उमामी-प्रधान’; गुचझु ज़िसुन अधिक ऑर्किड-स्वर व रेशमी।

* **मेंगडिंग गान लू ([蒙顶甘露](https://thetea.app/hi/article/mengding-gan-lu)):** सिचुआन प्रान्त से। यह भी प्राचीनतम “गोंगचा” (७४२ से), मुड़ी पत्ती, पुष्प-सुगंध। गान लू अधिक “ओस-भरा” और मीठा; गुचझु ज़िसुन आकृति में अधिक सीधा और विशिष्ट बैंगनी आभा लिए।

* **सोंगलो चा ([松萝茶](https://thetea.app/hi/article/songluo-cha), Sōngluó Chá):** अनहुई प्रान्त से। लू यू द्वारा उल्लिखित एक और ऐतिहासिक चाय। सोंगलो अधिक घास-युक्त व कसैली; गुचझु ज़िसुन अधिक नाज़ुक एवं मीठी।

* **यांगश्यान श्वेया ([阳羡雪芽](https://thetea.app/hi/article/yangxian-xue-ya)):** पड़ोसी यीशिंग (जियांगसू) से। यह भी तांग-कालीन “गोंगचा”। श्वेया अधिक सूई-सरीखी व “हिम-मय”; गुचझु ज़िसुन आकार में अधिक “बाँस-सम” और सुगंध में अधिक ऑर्किड-स्वर।

**अंत में:**

गुचझु ज़िसुन—यह वह चाय है जो हमें चीनी चाय-संस्कृति के आरंभिक स्रोतों से जोड़ती है। आठ शताब्दियों की शाही भेंट, लू यू का “चायों में प्रथम” का निर्णय, वसंत-तुड़ाई हेतु बुलाए तीस हज़ार श्रमिक—यह सब इस चाय के पीछे एक ऐसा पैमाना है, जिसकी आधुनिक चाय-कृषि कल्पना भी नहीं कर सकती। आज का गुचझु ज़िसुन एक पुनर्जीवित कृति है, जिसमें गुचझु पर्वत की बैंगनी कोंपलें, ऑर्किड-सुगंध और रेशमी मिठास यह स्मरण कराती हैं कि स्वर्गिक साम्राज्य की सर्वोत्तम चाय हांगझोऊ या फ़ूज्यान के प्रसिद्ध बगानों में नहीं, बल्कि चांगशिंग की सरल पहाड़ियों पर पैदा हुई—जहाँ चाय-ऋषि ने एक बार सम्राट को प्याला भेंट किया था।
