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title: "गु शू चा"
url: https://thetea.app/bho/article/gu-shu-cha
lang: bho
updated: 2026-04-08
source: THE TEA — encyclopedia of Chinese tea (https://thetea.app)
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# गु शू चा (古树茶, Gǔ shù chá)

* **प्रकार:**  बिसेस चाय प निर्भर करेला। ई **शेंग पुएर, शु पुएर, लाल चाय (गु शू होंग चा / गु शू शाई होंग), सफेद चाय** वगैरह हो सकेला। प्रसंस्करण तकनीक से तय होला, पेड़ के उमिर से ना। 2000 के दशक में एगो अलग ब्यापारिक श्रेणी **गु शू होंग चा ([古树](https://thetea.app/bho/article/gushu-dashu-taidi-yesheng)红茶)** बनल – पुरान रुख सभ से बनल लाल चाय, जवन ऊँच दाम वाला युन्नान दियानहोंग सभ के झंडाबरदार बा। गु शू होंग चा दू गो शैली में बनेला: **गु शू दियानहोंग** (उच्च ताप सुखाई, तेज सुगंध) आ **गु शू शाईहोंग** (धूप में सुखाई, पुरान होखे के गुन)।
* **श्रेणी:**  ई ओह चाय सभ के श्रेणी में आवेला जेह में पुरान रुख सभ के पत्ती इस्तेमाल होला। कच्चा माल के खासियत आ चाय प ओकर परभाव के चलते एकरा अलग समूह में रखल जाला।
* **उत्पत्ति:**  इतिहासी रूप से आ आजु बेसी हद तक, **युन्नान प्रांत (云南, Yúnnán), चीन**। इहवें सबसे जादे पुरान चाय के रुख बचल बाड़ें। हाल के समय में दोसर जगह भी पुरान रुख से कच्चा माल जमा कइल जाला, जइसे **फ़ुजियान प्रांत (福建, Fújiàn)** में, बाकिर ई उतना परंपरागत नइखे आ अइसन चाय कम मिलेला।
* **भूगोलीय निर्देशांक:**  कच्चा माल के बिसेस संग्रह अस्थान प निर्भर करेला। युन्नान में पुरान चाय के रुख सिशुआंगबान्ना (西双版纳, Xīshuāngbǎnnà), पुएर (普洱, Pǔ'ěr), लिंकांग ([临沧](https://thetea.app/bho/article/lincang), Líncāng) आ अउरी दोसर जिला सभ में पावल जालें।

**2. इतिहास आ सांस्कृतिक महत्व:**

* **इतिहास:**  युन्नान प्रांत में चाय के रुख हजारन साल से उग रहल बाड़ें। जदिमी समय से स्थानीय जनजाति सभ जंगली चाय के रुख से पत्ती तूर के खाए आ दवाई के रूप में इस्तेमाल करें। समय के साथ चाय के खेती होखे लागल, बाकिर जंगली अउरी पुरान रुख सभ से पत्ती जमा करे के परंपरा बचल रहल। पिछला दशकन में पुएर आ अउरी युन्नानी चाय के लोकप्रियता बढ़ला के बाद पुरान रुख के चाय (गु शू) के खास कदर होखे लागल आ ई अलग श्रेणी बन गइल।
* **नाँव:**

	* "गु" (古) - पुरान, प्राचीन।
	* "शू" (树) - रुख।
	* "चा" (茶) - चाय।
* **सांस्कृतिक महत्व:**  गु शू चा मात्र चाय नइखे, ई **प्रकृति, इतिहास अउरी परंपरा सभ से जुड़ाव** बा। एकर कदर एकर **"मूल रूप", "जंगलीपन", "प्राकृतिकता"** खातिर होला। ई मान्यता बा कि प्राकृतिक दसा में, आदमी के बिना तेज छेड़छाड़ के, उगे वाला पुरान रुख अपने पत्ती सभ में बिसेस ऊर्जा आ ताकत जमा करे लें, आ ओही के चाय में दे देलें। गु शू चा के शौकीन लोग खातिर ई कौनों प्राचीन, असली चीज के छुआई के मोका बा, असली चाय के स्वाद आ सुगंध के अनुभव करे के, जइसन सदियन पहिले रहल।

**3. वनस्पति विवरण आ कच्चा माल:**

* **किसिम:**  गु शू चा बनावे खातिर आम तौर पर **बड़हन पत्ती वाली किसिम युन्नान दा ये झोंग (云南大叶种, Yúnnán Dàyèzhǒng - "बड़हन युन्नानी पत्ती")** आ ओकर किसिम सभ इस्तेमाल होखे लीं जे *Camellia sinensis* var. *assamica* प्रजाति के हईं। कबो-कबो अउरी **गैर-चाय रुख सभ** से भी पत्ती जमा कइल जाला जे जंगल में चाय के संघे मिलजुल के उगल होखे लें – एकरा **"अलग-अलग रुख के मिलावट/ब्लेंड"** कहल जाला।
* **रुख सभ के उमिर:**  गु शू श्रेणी में **100 साल आ ओकरा से जादे** उमिर के चाय के रुख गिनल जालें, कबो-कबो **कई सौ आ हजार साल से जादे** के रुख भी मिले लें। उमिर के हिसाब से बाजार के बरगीकरन: **«ताईदी चा» (台地茶)** — बगइचा के झाड़ (5–50 साल); **«दा शू» (大树, «बड़हन रुख»)** — 50–100 साल; **«गु शू» (古树, «प्राचीन रुख»)** — 100+ साल; **«किन्नियान गु शू» (千年古树)** — 1000+ साल (बहुत कम मिलेला)। रुख के उमिर पत्ती के रासायनिक संघटन प परभाव डालेला, एहसे स्वाद, सुगंध आ चाय के परभाव प फरक पड़ेला। जेतना पुरान रुख, ओतने गहिर एकर जड़ तंत्र (सौ साल के रुख सभ में 5–10 मीटर तक ले) होला, जेकरा चलते ओह खनिज परत सभ तक पहुँच मिलेला जवन जवान झाड़ खातिर ना पहुँच वाला होला, आ एही से हर शांतोउ (山头 — पहाड़ी भाग) के आपन एगो अनोखा "खनिज चीन्हारी" बनेला।
	* **«मा ती» (马蹄) चीन्हारी:**  प्राचीन रुख के कोंपल सभ के निचले हिस्सा में बिसेस मोटाई होला — एकरा "खुरी" (马蹄, mǎ tí) कहल जाला। ई पुरान पेड़ के पत्ती होखे के एगो भरोसा मंद देखे जाए वाला चीन्हारी बा, जे भीजल पत्ती में उजागर होला।
	* **खास बात:**  चाय के रुख के उमिर ठीक-ठीक पता लगवावल बहुत मुश्किल बा, एहसे अंदाजा बहुते मोटामोटी होला। कुछ बेईमान बेचे वाला दाम बढ़ावे खातिर रुख के उमिर जादे बता सके लें।
* **चुनाई:**  आमतौर प बसंत में चुनाई होला, बाकिर गर्मी आ पतझड़ में भी कइल जा सकेला। सबसे कीमती बसंत के गु शू चा मानल जाला।
* **चुनाई मानक:**  उत्पादक आ चाय के प्रकार प निर्भर करेला। कली आ एक-दू गो ऊपरी पत्ती तूरल जा सकेला चाहे जादे पाकल पत्ती भी। बढ़िया किसिम के गु शू चाय खातिर खाली सबसे कोमल कच्चा माल इस्तेमाल होला।
* **कच्चा माल प माँग:**  बहुते ऊँच। खाली सेहतमंद, बेदाग पत्ती आ कली सभ इस्तेमाल होखे लीं जे कुछ खास रुख से तूरल गइल होखें। चुनाई बहुत सावधानी से, हाथे से कइल जाला।

**4. टेरवार आ खेती के खासियत:**

* **युन्नान प्रांत:**  पहाड़ी इलाका जहाँ उपोष्णकटिबंधीय आ उष्णकटिबंधीय जलवायु, उपजाऊँ माटी आ बनस्पति के बहुत बिबिधता बा।
* **उगे के ऊँचाई:**  पुरान चाय के रुख समुद्र तल से 1000 से 2300 मीटर आ एकरा से जादे ऊँचाई पर उगे लें।
* **माटी:**  बिबिध प्रकार के, खनिज तत्वन से भरपूर।
* **जलवायु:**  नम, भरपूर बरखा, लगातर कोहरा आ दिन-रात के तापमान में बड़ अंतर।
* **पारिस्थितिकी:**  प्राचीन चाय के जंगल साफ-सुथरी पारिस्थितिकी खातिर जानल जालें, काहे कि ई औद्योगिक केंद्रन से दूर पड़े लें आ आमतौर प रासायनिक छिड़काव ना होखेला।
* **जैव विविधता:**  पुरान चाय के रुख अउरी पौधन के बीचे उगे लें, एगो **संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र** बनावे लें। एहसे पत्ती के रासायनिक संघटन प परभाव पड़ेला आ चाय के अनोखा स्वाद-सुगंध के गुन मिलेला।
* **खास बात:**  गु शू चा के मुख्य खासियत बा **चाय के रुखन के उमिर आ ओह लोगन के उगे के प्राकृतिक दसा**। ई मानल जाला कि पुरान रुख के जड़ माटी में गहिराई ले जाला, ढेर खनिज आ पोषक तत्व चूस लेला, जेकरा से चाय ढेर भरपूर आ फायदेमंद बनेला। साथे-साथ खाद आ कीटनाशक के बिना प्राकृतिक रहवास चाय के एगो बिसेस "जंगलीपन" आ "शुद्धता" देला।
* **«शांतोउ» (山头) के बिचार:**  जइसे शराब बनावे में क्रू (cru) के इलाका होला, ओइसहीं युन्नान के चाय खेती में हर पहाड़ी भाग (शांतोउ) आपन खास स्वाद प्रोफाइल रचेला। जहाँ बगइचा के चाय (ताईदी चा) इलाका के आम बिसेसता देखावेला, उहाँ गु शू अपने भीतर कौनों खास पहाड़, खास ढाल, खास माटी के परत के "आवाज" समेटे ला। मुख्य नामी शांतोउ हईं: **लाओबांझांग ([老班章](https://thetea.app/bho/article/laobanzhang))** — ताकत आ धमाकेदार हुई गान; **ईवू ([易武](https://thetea.app/bho/article/yi-wu))** — शहद आ कोमलता; **बींगदाओ ([冰岛](https://thetea.app/bho/article/bing-dao))** — बरफीला मिठास; **जिंगमाई (景迈)** — ऑर्किड आ फूलदारपन; **शीगुई ([昔归](https://thetea.app/bho/article/xi-gui))** — गाढ़ापन आ बिसेस खट्टापन; **फेंगचिंग (凤庆)** — कैरामेल आ ताकत।

**5. उत्पादन प्रौद्योगिकी:**

गु शू चा के उत्पादन तकनीक बिसेस प्रकार के चाय (शेंग पुएर, शु पुएर, लाल, सफेद वगैरह) प निर्भर करेला। आम सिद्धांत बा:
* **कम से कम छेड़छाड़:**  मुख्य मकसद बा चाय के पत्ती के प्राकृतिक गुन जेतना हो सके बचावल जाव, जे प्रकृति ओकरा देले बिया।
* **परंपरागत तरीका:**  अक्सर समय-परीक्षित परंपरागत प्रसंस्करण तरीका इस्तेमाल होखे लें।
* **हाथ के काम:**  उत्पादन के कई दौर, खासकर चुनाई आ छँटाई, हाथे से कइल जाला।

**6. ऑर्गेनोलेप्टिक गुन:**

गु शू चा के ऑर्गेनोलेप्टिक गुन बिसेस चाय के प्रकार (शेंग पुएर, शु पुएर, लाल, सफेद वगैरह), रुख के उमिर, टेरवार, चुनाई के मौसम आ प्रसंस्करण तकनीक प बहुत निर्भर करेला। फिर भी कुछ साझा बिसेसता बतावल जा सकेला:
* **बाहरी रूप:**  चाय के प्रकार प निर्भर। शेंग पुएर खातिर बड़-बड़, मोसल पत्ती, अक्सर रोवाँदार। शु पुएर खातिर गहिर भूअर रंग के पत्ती। लाल चाय खातिर मरोरल पत्ती, जेह में अक्सर सुनहरी टिप्स (कली) होखे।
* **सुगंध:**  आम तौर पर जवान झाड़ वाली चाय से **ढेर गहिर, जटिल आ टिकाऊ**। सुगंध में **सूखा मेवा, फूल, शहद, मेवा, काठ, मसाला, माटी, पुरान किताब, कपूर** वगैरह के नोट हो सकेला। सुगंध चाय के प्रकार आ उमिर के हिसाब से बदलेला।
* **स्वाद:**  **भरपूर, गाढ़, बहुआयामी, संतुलित**। अक्सर **मिठास, हल्का कड़वाहट या खटास, लमहर, ढँकुआ देबे वाला बाद के स्वाद** होला। चाय के प्रकार आ उमिर के साथ स्वाद बदलेला। एगो खास बिसेसता बा स्वाद के तथाकथित **"जंगलीपन"**, जेकरा शब्दन में बतावल मुश्किल बा, बाकिर ई पुरान रुख के चाय के बगइचा वाली से अलग करेला।
* **अरक के रंग:**  चाय के प्रकार प निर्भर। शेंग पुएर खातिर हल्का पीयर से लेके अम्बर-भूअर, शु पुएर खातिर गहिर भूअर, लगभग करिया, लाल चाय खातिर अम्बर-लाल।
* **चाय के तली:**  चाय के प्रकार प निर्भर। आमतौर पर पूरा, लचकदार पत्ती, जे भीजे के बाद खुल गइल होखे।

**7. रासायनिक संघटन:**

गु शू चा में जवान झाड़ वाली चाय के तुलना में आमतौर पर ढेर भरपूर रासायनिक संघटन होला:
* **पॉलीफेनोल:**  पॉलीफेनोल के बेस मात्रा, जेह में कैटेचिन, थिएफ्लेविन, थिएरुबिगिन शामिल बा।
* **अमीनो एसिड:**  अमीनो एसिड से भरपूर, खासकर L-थिएनिन।
* **एल्कलॉइड:**  कैफीन, थियोब्रोमिन, थियोफिलिन।
* **आवश्यक तेल:**  जटिल संघटन वाला आवश्यक तेल, जे बहुआयामी सुगंध के कारन बनेला।
* **विटामिन:**  C, समूह B, E, K।
* **खनिज:**  पोटैशियम, फ्लोरीन, मैग्नीशियम, मैंगनीज, लोहा, सेलेनियम वगैरह।

**8. फायदेमंद गुन:**

गु शू चा के फायदेमंद गुन चाय के प्रकार (शेंग, शु, लाल, सफेद वगैरह) से तय होला आ ई मानल जाला कि रुख के उमिर आ प्राकृतिक उगे के दसा से ई गुन अउरी बढ़ जालें। आम फायदेमंद गुन:
* **शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट परभाव:**  कोशिका सभ के नोकसान से बचावेला, बुढ़ापा के धीरे करेला।
* **टॉनिक असर:**  स्फूर्ति देला, एकाग्रता बढ़ावेला, थकान दूर करेला।
* **पाचन में सुधार:**  पाचन के उत्तेजित करेला, भोजन के पचावे में मदद करेला।
* **हृदय-रक्तवाहिका तंत्र:**  दिल आ रक्तवाहिका प सकारात्मक परभाव डाल सकेला।
* **डिटॉक्स:**  बिसाक्त पदार्थ बाहर निकासे में मदद करेला।
* **रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करे:**  शरीर के रोग से लड़े के ताकत बढ़ावेला।
* **बिसेस ऊर्जा:**  कई शौकीन पुरान रुख के चाय के शरीर अउरी चेतना पर एगो बिसेस, ताकतवर परभाव बतावे लें, जेकरा "चा ची" (茶氣 - "चाय के ची") कहल जाला। ई शरीर में बहे वाला गरमी के एहसास, हलका पसीना (खासकर पीठ आ हथेली में), एकाग्र साफ-सफाई आ "सांत" ऊर्जा के जोश के रूप में सामने आवेला। ई कैफीन, L-थिएनिन, खनिज आ सूक्ष्म तत्वन के मिलजुल के परभाव बा, जे गहिर जड़ तंत्र दुआरा प्राचीन माटी के परतन से खींचल जालें। असली गु शू के एगो प्रमुख चीन्हारी "चा ची" मानल जाला: बगइचा के चाय में ई परभाव ना होखेला या बहुत कमजोर होखेला।
* **बहुत बेर पानी डालल जाए के सहनशक्ति:**  असली गु शू चा 10–15 या एकरा से जादे बेर पानी डाले पर भी स्वाद आ सुगंध में बहुत कमी ना आवेला — ई ओही प्रकार के बगइचा वाली चाय से 1.5–2 गुना जादे बार बचे ला। ई पत्ती के गाढ़पन आ भरपूरपन के सीधा नतीजा बा, जे रुख के उमिर आ जड़ तंत्र के गहिराई के कारन होला।

**9. पकावे के तरीका:**

गु शू चा पकावे के तरीका बिसेस चाय के प्रकार प निर्भर करेला। सामान्य सलाह:
* **पानी के तापमान:**  शेंग पुएर खातिर — 85-95°C, शु पुएर खातिर — 95-100°C, लाल चाय खातिर — 90-95°C, सफेद चाय खातिर — 70-85°C।
* **चाय के मात्रा:**  150-200 मिली पानी खातिर 5-7 ग्राम।
* **बर्तन:**  गाइवान, इसिंग माटी के किटली, चीनी माटी के बर्तन।
* **प्रक्रिया:**  बर्तन के गरम कईल, चाय के धोई (पुएर खातिर), पानी डाल-डाल के पकावल आ धीरे-धीरे भीजे के समय बढ़ावल।
* **पानी डाले के संख्या:**  चाय के प्रकार आ कच्चा माल के गुनवत्ता प निर्भर। नीमन गु शू चाय कई बेर (7-10 आ जादा) पानी डालल सह सकेला।

**10. भंडारण:**

भंडारण के दसा चाय के प्रकार प निर्भर करेला। शेंग पुएर, जइसे पुरान रुख के कुछ अउरी किसिम, लमहर समय ले रखे आ पाके खातिर बनल होखे लें। एकरा सूखा, अँधेरिया, हवादार जगह में, "साँस लेवे वाला" डिब्बा (माटी, सेरामिक, कागद) में रखल जाला। शु पुएर, लाल आ सफेद चाय के हवाबंद डिब्बा में, सूखा, ठंडा, अँधेरिया जगह में रखल जाला।

**11. दाम आ नकली चाय:**

गु शू चा **महँगा, उम्दा चाय** के श्रेणी में आवेला। एकर ऊँच दाम के कारन बा:
* **दुर्लभता:**  पुरान चाय के रुख के संख्या सीमित बा।
* **चुनाई के कठिनाई:**  पुरान, खासकर जंगली रुख से कच्चा माल जमा करे में मेहनत जादे आ कबो-कबो खतरनाक बा।
* **कच्चा माल के ऊँच गुनवत्ता:**  पुरान रुख जादे भरपूर स्वाद, सुगंध आ ताकतवर परभाव वाली चाय देलें।
* **ऊँच माँग:**  गु शू चा के माँग लगातार बढ़त बा।

**नकली से कइसे बचीं:**

* **भरोसेमंद बेचे वाला से खरीदीं:**  बिसेस चाय के दोकान देखीं, जेकर नीमन नाँव होखे, जे चाय के उत्पत्ति के जानकारी दे सके।
* **बहुत कम दाम से सावधान रहीं:**  बहुत ससता दाम देख के सतर्क होखे के चाहीं।
* **बाहरी रूप ध्यान से जाँचीं:**  पत्ती पूरा होखे के चाहीं, बिसेस चाय के किसिम के बिबरन से मेल खाए।
* **सुगंध के परख करीं:**  सुगंध ओह चाय के बिसेसता वाला होखे के चाहीं, बाहरी मिलावट ना होखे।
* **अरक जाँचीं:**  अरक के रंग, स्वाद आ सुगंध बिबरन के मुताबिक होखे।
* **रुख के उमिर प धियान दीं:**  जदि उमिर लिखल होखे त जानकारी जाँचीं। धियान राखीं कि उमिर जाँचल मुश्किल बा, एहीसे खाली भरोसा जोग स्रोत पर बिस्वास करीं।

**12. दिलचस्प तथ्य:**

* **चाय के "टेरवार":**  युन्नान में शराब बनावे के नियर "टेरवार" के धारना के मानल जाला — माटी-जलवायु दसा के सम्मिलित जोड़, जे चाय के स्वाद आ सुगंध प परभाव डालेला। अलग-अलग पहाड़, घाटी आ केहू अलग रुख तक से बिसेस गुन वाली चाय मिल सकेला। पुएर आ गु शू होंग चा के बाजार में शांतोउ के आधार पर लॉट के चीन्हा लगावल जाला आ जगह के नाँव के हिसाब से दाम 5–10 गुना तक फरक क सकेला।
* **"जंगली चाय":**  गु शू चा के कुछ किसिम जंगली चाय के रुख ([野生茶](https://thetea.app/bho/article/ye-sheng-cha), ये शेंग चा) से जमा कइल जालें, जेकरा चलते ई अउरी दुर्लभ आ कीमती होखे लीं। जंगली रुख अउरी साफ "जंगलीपन" लिहले स्वाद आ अनुमान लगावल मुश्किल प्रोफाइल वाली चाय देलें।
* **चाय आ सेहत:**  पारंपरिक चीनी दवाई में पुरान रुख के चाय सेहत आ लमहर उमिर खातिर खास फायदेमंद मानल जाला।
* **गु शू होंग चा — पुएर आ लाल चाय के बीच "पुल":**  पुरान पेड़ के कच्चा माल से बनल लाल चाय, खासकर शाईहोंग ([晒红](https://thetea.app/bho/article/shaihong), धूप-सुखाई) के रूप में, एगो अनोखा "पुल" बन गइल बा: कच्चा माल आ भंडारण के संभावना में ई शेंग पुएर के करीब बा, प्रसंस्करण तकनीक में — लाल चाय के। एकरा चलते युन्नानी लाल चाय के ओर पुएर संग्रह करे वाला लोग आकर्षित भइल।
* **«ताईहे मीठ चाय» (太和甜茶):**  पुरान रुख के कच्चा माल से युन्नानी लाल चाय के सबसे प्राचीन अगुआ — जेन्युआन (镇沅) इलाका के एगो लोक उत्पाद, 300+ साल से लगातार परंपरा, युन्नान प्रांत के अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर (2022 से)।
* **फेंग शाओक्यू आ बड़हन बदलाव:**  दियानहोंग के संस्थापक फेंग शाओक्यू (冯绍裘) 1938 में फेंगचिंग में युन्नानी लाल चाय के पहिला खेप बनवलें; हालाँकि 2000 के दशक ले लाल चाय खातिर खाली बगइचा वाला कच्चा माल इस्तेमाल होखे — कीमती पुरान रुख के पत्ती से होंगचा बनावे के बिचार फजूलखर्ची लउके।

**13. युन्नान में गु शू चा के परसिद्ध उत्पादन इलाका:**

* **सिशुआंगबान्ना (Xishuangbanna):**

	* **ई वू (Yiwu):**  सबसे परसिद्ध आ प्रतिष्ठित चाय इलाका में से एक।
	* **लाओ बान झांग (Lao Ban Zhang):**  गाँव, जे आपन ताकतवर आ महँगा शेंग पुएर खातिर जानल जाला।
	* **बू लांग शान (Bu Lang Shan):**  पहाड़ी इलाका, जहाँ बहुत पुरान चाय के रुख बाड़ें।
	* **मेंग सोंग (Meng Song):**  एगो अउरी परसिद्ध इलाका जहाँ प्राचीन चाय के जंगल बाड़ें।
* **लिंकांग (Lincang):**

	* **बींग दाओ (Bing Dao):**  गाँव, जे आपन पुरान रुख वाला शेंग पुएर खातिर मशहूर बा।
	* **शीगुई (Xigui):**  आपन ताकतवर आ सुगंधित शेंग पुएर खातिर जानल जाला।
* **पुएर (Pu'er):**

	* **जिंग माई (Jing Mai):**  पहाड़ी इलाका जहाँ प्राचीन चाय के बगइचा बाड़ें।

**अंत में:**

गु शू चा चाय के एगो अनोखा श्रेणी बा, जे अपने भीतर प्राचीन चाय के रुख सभ के ताकत आ बुद्धिमानी, प्रकृति के मूल सुंदरता आ युन्नान प्रांत के चाय खेती के सबसे भरपूर परंपरा सभ के समेटले बा। **अंत में (आगे):**

ई चाय ओह लोग खातिर बा जे सच्चाई, स्वाद आ सुगंध के गहिराई, ताकतवर परभाव के कदर करे लें आ प्राचीन चाय परंपरा के दुनिया में एगो दिलचस्प यात्रा पर निकले खातिर तइयार बाड़ें। असली गु शू चा चखल इतिहास के छूए, प्रकृति से जुड़ाव के महसूस करे आ बेजोड़ चाय अनुभव हासिल करे के बराबर बा। ई खाली एगो पेय नइखे — ई एगो पूरा दर्शन बा, अपने आप के आ आसपास के दुनिया के जाने के रास्ता।
